महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों में बड़े बदलाव: मेंटेनेंस बकाया पर सिर्फ 12% जुर्माना, आसान होगा सेल्फ-रीडेवलपमेंट, जानिए फ्लैट मालिकों के लिए क्या बदला
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका असर लाखों फ्लैट मालिकों पर पड़ेगा। सरकार ने महाराष्ट्र सहकारी संस्था नियम, 1961 में संशोधन करते हुए नई नियमावली लागू की है। इसका उद्देश्य सोसायटियों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, विवाद कम करना, वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाना और निर्णय प्रक्रिया को आसान बनाना है। नए नियमों में मेंटेनेंस शुल्क, पार्किंग, सेल्फ-रीडेवलपमेंट, नॉमिनी के अधिकार, ऑनलाइन बैठकें और वित्तीय प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इन बदलावों से फ्लैट मालिकों को बिलिंग में अधिक पारदर्शिता, देर से भुगतान पर कम आर्थिक बोझ, नॉमिनी को बेहतर अधिकार और सोसायटी के संचालन में अधिक स्पष्टता मिलेगी। आइए जानते हैं कि नए नियमों में क्या-क्या बदला है और इसका आपके ऊपर क्या असर पड़ेगा। मेंटेनेंस बकाया पर ब्याज अब सिर्फ 12% सबसे बड़ी राहत उन सदस्यों को मिली है जो किसी कारणवश समय पर मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं कर पाते। पहले हाउसिंग सोसायटियां बकाया मेंटेनेंस पर 21% तक वार्षिक ब्याज वसूल सकती थीं। अब नए नियमों के तहत यह अधिकतम ब्याज ...